भाई दूज की कहानी, Bhai Dooj Katha Kahani ( Best kahani )

भाई दूज की कहानी, Bhai Dooj Katha Kahani

दोस्तो आपका हमारे ब्लॉग में स्वागत है दोस्तो आज हम इस आर्टिकल में आपको भाई दूज की कहानी के बारे में बतायेगे दोस्तो भाई दूज बहिन ओर भाई का त्योहार होता है भाईदूज के दिन भाई अपने बहिन के घर पर जाता है और वही पर स्नान करता है और चावल का भोजन करता है इस दिन भाई का बहन के घर भोजन करने का विशेष महत्त्व है । चाहे बहन चचेरी , ममेरी या धर्म की ही क्यों न हो । भाई भोजन आदि के पश्चात् बहन से तिलक करवाते हैं और बहनों को वस्त्राभूषण आदि उपहार स्वरूप देते हैं

यह त्योहार दीपावली के दूसरे दिन आता है यानिकि पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है । इस पर्व का प्रमुख लक्ष्य भाई – बहन के पावन सम्बन्ध तथा प्रेम भाव की स्थापना करना है । भैया दूज के दिन बहिने भाई को तिलक लगाकर उनके स्वस्थ तथा दीर्घायु होने की मंगलकामना करती हैं ।

इस दिन भाई अपनी बहन के घर तिलक करवाने जाते हैं। भाई अपनी बहन की रक्षा का वादा करते हुए उन्हें तोहफा देते हैं। भाई दूज को मनाने के पीछे धार्मिक मान्यता है कि यमराज ने भी इसी तिथि को अपनी बहन यमुना से नोत लिया था। भाइयों द्वारा बहनों को नोत लेने के बाद यथासंभव उपहार दिया जाता है और बहनों के हाथों से भोजन ग्रहण किया जाता है

भाई दूज क्यो बनाया जाता है

भैया दूज पौराणिक कथा

भैया दूज के संबंध में पौराणिक कथा इस प्रकार से है। सूर्य की पत्नी संज्ञा से 2 संतानें थीं, पुत्र यमराज तथा पुत्री यमुना। संज्ञा सूर्य का तेज सहन न कर पाने के कारण अपनी छायामूर्ति का निर्माण कर उन्हें ही अपने पुत्र-पुत्री को सौंपकर वहाँ से चली गई। छाया को यम और यमुना से अत्यधिक लगाव तो नहीं था, किंतु यमुना अपने भाई यमराज से बड़ा स्नेह करती थीं।

यमुना अपने भाई यमराज के यहाँ प्राय: जाती और उनके सुख-दुःख की बातें पूछा करती। तथा यमुना, यमराज को अपने घर पर आने के लिए भी आमंत्रित करतीं, किंतु व्यस्तता तथा अत्यधिक दायित्व के कारण वे उसके घर न जा पाते थे।

एक बार कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज अपनी बहन यमुना के घर अचानक जा पहुँचे। बहन के घर जाते समय यमराज ने नरक में निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। बहन यमुना ने अपने सहोदर भाई का बड़ा आदर-सत्कार किया। विविध व्यंजन बनाकर उन्हें भोजन कराया तथा भाल पर तिलक लगाया। जब वे वहाँ से चलने लगे, तब उन्होंने यमुना से कोई भी मनोवांछित वर मांगने का अनुरोध किया।

यमुना ने उनके आग्रह को देखकर कहा: भैया! यदि आप मुझे वर देना ही चाहते हैं तो यही वर दीजिए कि आज के दिन प्रतिवर्ष आप मेरे यहाँ आया करेंगे और मेरा आतिथ्य स्वीकार किया करेंगे। इसी प्रकार जो भाई अपनी बहन के घर जाकर उसका आतिथ्य स्वीकार करे तथा इस दिन जो बहन अपने भाई को टीका करके भोजन खिलाये, उसे आपका भय न रहे। इसी के साथ उन्होंने यह भी वरदान दिया कि यदि इस दिन भाई-बहन यमुना नदी में डुबकी लगाएंगे तो वे यमराज के प्रकोप से बचे रहेंगे।

यमुना की प्रार्थना को यमराज ने स्वीकार कर लिया। तभी से बहन-भाई का यह त्यौहार मनाया जाने लगा।

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भाई दूज की कहानी Bhai Dooj Katha Kahani

दोस्तो आइये हम जानते है कि भाई दूज क्यो बनाया जाता है और इसकी कथा सुनते है

दोस्तो एक गाँव मे एक बुढ़िया रहती थी जिसके 7 बेटे थे और एक बेटी थी। बेटी की शादी हो गई थी और जब उसके सबसे बड़े बेटे की शादी हो रही थी उस समय साँप आया ओर उसके बेटे को डस लिया जिससे उसकी मौत हो गई ओर उसकी बहु विधवा हो गई

उसी प्रकार जब अन्य भाई की शादी होती तो वहां पर साँप आ जाता ओर उसके बेटे हो डस जाता जिससे उसकी मौत हो जाती वह उसकी बहु विधवा हो जाती तो यह इसी तरह से 6 बेटों की मौत हो गई

लेकिन सातवे बेटे की शादी होनी अभी बाकी थी ओर वह बुढ़िया 6 बेटों की मौत पर रो रोकर अंधी हो गई
उसके बाद जब भाई ढुज का समय आने लगा तो वह सातवा बेटा अपनी माँ को बोलता है कि मेरी बहिन से में तिलक करवाने जाऊँगा तो माँ ने कह दिया कि चले जाना

उधर जब बहिन को पता चला की उसका भाई आ रहा है तो वह खुशी से पागल होकर पड़ोसन के गयी और पूछने लगी की जब बहुत प्यारा भाई घर आए तो क्या बनाना चलिए? पड़ोसन उसकी खुशी को देख कर जलभुन गयी और कह दिया कि,” दूध से रसोई लेप, घी में चावल पका| ” बहिन ने एसा ही किया|

उधर जब भाई अपने बहिन के घर पर जा रहा था तो उसे रस्ते में एक साँप मिला जो कि उसे डसना चाहता था

लेकिन बहिन के भाई ने साँप से पूछा कि तुम मुझे क्यो डसना चाहते हो।

तो साँप बोला कि म तेरा काल हु ओर में तुम्हे डसुगा ओर मारूंगा

भाई बोला। अभी तो म मेरी बहिन के पास जा रहा हु क्यो की वह मेरा इंतज़ार कर रही है म वापिस आऊँगा तब डस लेना

साँप ने कहा- भला आज तक कोई अपनी मौत के लिए लौट के आया है, जो तुम आऔगे|

भाई ने कहा- अगर तुझे यकीन नही है तो तू मेरे झोले ( ठेले/ बेग ) में बैठ जा ओर जब मैं अपनी बहिन के तिलक कर लू तब तू मुझे डस लेना साँप ने एसा ही किया

भाई अपने बहिन के घर पहुच गया और दोनों मिलकर बड़े ही खुश हुवे।

दोनों आपस मे मिले और बाद में भइया ने खाना मागा की मुझे बहुत तेज बूख लगी है खाना खिला दो।

बहिन क्या करे| न तो दूध की रसोई सूखे, न ही घी में चावल पके|
भाई ने पूछा- बहिन इतनी देर क्यूँ लग रही है? तू क्या पका रही है?

तब बहिन ने बताया कि में दूध से रशोई में पोचा लगाया वह घी के चावल बनाये तो उसने सभी बात एसे एसे बता दी।

भाई बोला पगली ऐसा भी कोई करता है तू गोबर से रसोई लिप ओर दूध से चावल बना

बहिन ने एसा ही किया ओर भैया को खाना खिलाया
खाना खा के भाई को बहुत ज़ोर नींद आने लगी| इतने में बहिन के बच्चे आ गये| बोले-मामा मामा हमारे लिए क्या लाए हो?
भाई बोला- में तो कुछ नही लाया बच्चो ने वह झोला ले लिया जिसमें साँप था जेसे ही उसे खोला, उसमे से हीरे का हार निकला

बहिन बोली भईया आप मेरे लिए इतना सुंदर हार लेकर आये हो और आपने मुझे बताया तक भी नही

अगले दिन सुबह भाई बोला बहिन तुम मेरे लिए खाना बना दो अब मुझे जाना होगा तो बहिन ने अपने भाई के लिए लड्डू बनाकर एक डिब्बे में रख देती है ओर वह डिब्बा अपने भाई को दे देती है

भाई कुछ दूर जाकर, थक कर एक पेड़ के नीचे सो जाता है उधर उसकी बहिन के बच्चों को जब भूख लगी तो माँ से कहा की खाना दे दो हमे बूख लगी है
माँ ने कहा- खाना अभी बनने में देर लगेगी तो बच्चे बोले कि मामा को जो रखा है वही दे दो| तो वह बोली की लड्डू बनाने के लिए बाजरा पीसा था, वही बचा पड़ा है
चक्की में, जाकर खा लो बच्चों ने वहां जाकर देखा कि चक्की में तो साँप की हड्डियाँ पड़ी है

यही बात माँ को आकर बताई तो वह बावड़ी सी हो कर भाई के पीछे भागी| रास्ते भर लोगों से पूछती की किसी ने मेरा गैल बाटोई देखा, किसी ने मेरा बावड़ा सा भाई देखा| तब एक ने बताया की कोई लेटा तो है पेड़ के नीचे, देख ले वही तो नहीं| भागी भागी पेड़ के नीचे पहुची| अपने भाई को नींद से उठाया| भैया भैया कहीं तूने मेरे लड्डू तो नही खाए!!

भाई बोला अभी नही खाये ये ले तेरे लड्डू

बहिन बोली तुम झुठ बोल रहे हो तूने लड्डू खाये है में तुमारे साथ चलूंगी।

भईया बोला अगर तुम नही मां रहे तो चलो मेरे साथ

चलते चलते रस्ते में बहिन को प्यास लग जाती है तब भाई को बोलती है कि मुझे प्यास लग गई। ओर मुझे पानी पीना है

भाई बोला- मैं यहाँ तेरे लिए पानी कहाँ से लेकर आहू
देख दूर कहीं चील उड़ रहीं हैं,वहां पर चली जा वहाँ शायद तुझे पानी मिल जिससे तुमारी प्यास मिट जाए।

तब बहिन वहाँ गयी, और पानी पी कर जब लौट रही थी तो रास्ते में देखती है कि एक जगह ज़मीन में 6 शिलाए गढ़ी हैं, और एक बिना गढ़े रखी हुई थी| उसने एक बुढ़िया से पूछा कि ये शिलाएँ कैसी हैं|

उस बुढ़िया ने बताया कि- एक बुढ़िया है| उसके सात बेटे थे| 6 बेटे तो शादी के मंडप में ही मर चुके हैं, तो उनके नाम की ये शिलाएँ ज़मीन में गढ़ी हैं, अभी सातवे की शादी होनी बाकी है| जब उसकी शादी होगी तो वह भी मंडप में ही मर जाएगा, तब यह सातवी सिला भी ज़मीन में गड़ जाएगी|

यह सुनकर बहिन समझ गयी ये सिलाएँ किसी और की नही बल्कि उसके भाइयों के नाम की हैं| उसने उस बुढ़िया से अपने सातवे भाई को बचाने का उपाय पूछा| बुढ़िया ने उसे बतला दिया कि वह अपने सातवे भाई को केसे बचा सकती है| सब जान कर वह वहाँ से अपने बॉल खुले कर के पागलों की तरह अपने भाई को गालियाँ देती हुई चली|

भाई के पास आकर बोलने लगी- तू तो जलेगा, कुटेगा, मरेगा| भाई उसके एसे व्यवहार को देखकर चोंक गया पर उसे कुछ समझ नही आया| इसी तरह दोनो भाई बहिन माँ के घर पहुँच गये| थोड़े समय के बाद भाई के लिए सगाई आने लगी| उसकी शादी तय हो गयी|

जब भाई को सहरा पहनाने लगे तो वह बोली- इसको क्यू सहरा बँधेगा, सहारा तो मैं पहनूँगी| ये तो जलेगा, मरेगा| सब लोगों ने परेशान होकर सहरा बहिन को दे दिया| बहिन ने देखा उसमें कलंगी की जगह साँप का बच्चा था| बहिन ने उसे निकाल के फैंक दिया

अब जब भाई घोड़ी चढ़ने लगा तो बहिन फिर बोली- ये घोड़ी पर क्यू चढ़ेगा, घोड़ी पर तो मैं बैठूँगी, ये तो जलेगा, मरेगा, इसकी लाश को चील कौवे खाएँगे| सब लोग बहुत परेशान हो जाते है उससे परेशान होकर सब ने उसे घोड़ी पर भी चढ़ने दिया| जब बारात चलने को हुई तब बहिन बोली- ये क्यू दरवाजे से निकलेगा, ये तो पीछे के रास्ते से जाएगा, दरवाजे से तो मैं निकलूंगी| जब वह दरवाजे के नीचे से जा रही थी तो दरवाजा अचानक गिरने लगा| बहिन ने एक ईंट उठा कर अपनी चुनरी में रख ली, दरवाजा वही की वही रुक गया| सब लोगों को बड़ा अचंभा हुआ

रास्ते में एक जगह बारात रुकी तो भाई को पीपल के पेड़ के नीचे खड़ा कर दिया| बहिन कहने लगी- ये क्यू छाव में खड़ा होगा, ये तो धूप में खड़ा होगा| छाँव में तो मैं खड़ी होगी| जैसे ही वह पेड़ के नीचे खड़ी हुई, पेड़ गिरने लगा| बहिन ने एक पत्ता तोड़ कर अपनी चुनरी में रख लिया, पेड़ वही की वही रुक गया| अब तो सबको विश्वास हो गया की ये बावली कोई जादू टोना सिख कर आई है, जो बार बार अपने भाई की रक्षा कर रही है| एसे करते करते फेरों का समय आ गया|

जब दुल्हन आई तो उसने दुल्हन के कान में कहा- अब तक तो मैने तेरे पति को बचा लिया, अब तू ही अपने पति को और साथ ही अपने मरे हुए जेठों को बचा सकती है

फेरों के समय एक नाग आया, वो जैसे ही दूल्हे को डसने को हुआ , दुल्हन ने उसे एक लोटे में भर के उपर से प्लेट से बंद कर दिया| थोड़ी देर बाद नागिन लहर लहर करती आई

दुल्हन से बोली- तू मेरा पति छोड़| दुल्हन बोली- पहले तू मेरा पति छोड़| नागिन ने कहा- ठीक है मैने तेरा पति छोड़ा| दुल्हन- एसे नहीं, पहले तीन बार बोल| नागिन ने 3 बार बोला, फिर बोली की अब मेरे पति को छोड़|

दुल्हन बोली- एक मेरे पति से क्या होगा, हसने बोलने क लिए जेठ भी तो होना चाहिए, एक जेठ भी छोड़| नागिन ने जेठ के भी प्राण दे दिए| फिर दुल्हन ने कहा- एक जेठ से लड़ाई हो गयी तो एक और जेठ छोड़| वो विदेश चला गया तो तीसरा जेठ भी छोड़| ( भाई दूज की कहानी, Bhai Dooj Katha Kahani )

इस तरह एक एक करके दुल्हन ने अपने 6 जेठ जीवित करा लिए| उधर रो रो के बुढ़िया का बुरा हाल था| कि अब तो मेरा सातवा बेटा भी बाकी बेटों की तरह मर जाएगा| गाँव वालों ने उसे बताया कि उसके सात बेटा और बहुए आ रही है

तो बुढ़िया बोली- गर यह बात सच हो तो मेरी आँखो की रोशनी वापस आ जाए और मेरे सीने से दूध की धार बहने लगे| एसा ही हुआ| अपने सारे बहू बेटों को देख कर वह बहुत खुश हुई, बोली- यह सब तो मेरी बावली का किया है| कहाँ है मेरी बेटी?

सब बहिन को ढूँढने लगे| देखा तो वह भूसे की कोठरी में सो रही थी| जब उसे पता चला कि उसका भाई सही सलामत है तो वह अपने घर को चली| उसके पीछे पीछे सारी लक्ष्मी भी जाने लगी| बुढ़िया ने कहा- बेटी, पीछे मूड के देख! तू सारी लक्ष्मी ले जाएगी तो तेरे भाई भाभी क्या खाएँगे| ( भाई दूज की कहानी, Bhai Dooj Katha Kahani )

तब बहिन ने पीछे मूड के देखा और कहा- जो माँ ने अपने हाथों से दिया वह मेरे साथ चल, बाद बाकी का भाई भाभी के पास रह| इस तरह एक बहिन ने अपने भाई की रक्षा की ( भाई दूज की कहानी, Bhai Dooj Katha Kahani )

निष्कर्ष

दोस्तो आज हमने आपको बताया कि भाई दूज क्या है भाई ढुज की एक कहानी जिसमे 7 भाई और एक बहिन होती है जो कि अपने भाई की रक्षा करती है इस पर आधारित यह कहानी आपको लिखकर बताई है जिसको पढ़ने के बाद आपको यह कहानी आपको भी अच्छी तरह से याद हो जाएगी दोस्तो अगर आपको हमारी कहानी अच्छी लगी तो आप हमें कॉमेंट कर सकते हो जिससे हमें खुशी होगी और आपके लिए ओर भी कहानी लेकर आते रहेंगे जो किसी ना किसी पर आधारित हो। भाई दूज की कहानी, Bhai Dooj Katha Kahani

दोस्तो अगर आपको कोई कहानी लिखवानी है या पूछनी है तो आप हमें कॉमेंट कर सकते हो हम आपके द्वारा बतायेगे गये कीवर्ड पर भी एक कहानी लिखेगे जो कि अधिक से अधिक लोगो के पास जाएगी वह सभी आपके द्वारा बताई गई कहानी को बड़ी खुशी के साथ पढेंगे। भाई दूज की कहानी, Bhai Dooj Katha Kahani

दोस्तो अगर आपको हमारे आर्टिक्ल में कोई कमी लग रही है तो भी हमे कॉमेंट कर सकते हो जिससे हम आपके द्वारा बताई गई कमी को दूर करेगे। भाई दूज की कहानी, Bhai Dooj Katha Kahani ( भाई दूज की कहानी, Bhai Dooj Katha Kahani ) ( भाई दूज की कहानी, Bhai Dooj Katha Kahani ) ( भाई दूज की कहानी, Bhai Dooj Katha Kahani ) ( भाई दूज की कहानी, Bhai Dooj Katha Kahani )

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कुलवंत सिंह भाटी
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम कुलवंत सिंग भाटी है। मैं आपको किसान समाधान ब्लॉग पर खेती, फसलों, कृषि यंत्रो, खाद तथा किसानों के लिए आने वाली योजनाओं से जुड़ी सारी जानकारी शेयर करता हूँ।
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