Hari Mirch Ki Kheti Kaise Kare | हरी मिर्च की खेती से करोड़पति कैसे बने

किसान भाइयो हरी मिर्च की बाजार में कमी को देखते हुवे दिन प्रतिदिन मिर्चो का भाव बढ़ता जा रहा है कमी के कारण लाल मिर्च का भी भाव बढ़ता जा रहा है इसको देखते हुवे हरी मिर्च की खेती से लाखों रुपये कमाये जा सकते है
किसान भाइयों क्या आप भी हरी मिर्च की खेती करके करोड़पति बनना चाहते है तो में आज आपको हरी मिर्च की खेती के बारे में बताउगा जिससे आपको बहुत से नियमो पर धियान देना होगा जैसे कि आपको कोनसा बीज लगाना उचित रहेगा, कोनसी खाद डालनी है कोनसे रोग अधिक लगते है और उससे किस प्रकार बचे, अधिक फल लगने के लिए क्या करे , कितने समय पर पानी लगाए मिर्च से सम्बंधित सभी जानकारी आपको इसी आर्टिकल में दी जाएगी
तो आइए आपको हरी मिर्च की खेती के बारे में विस्तार से समझाते है

हरी मिर्च की खेती का समय | hari mirch ki kheti kab hoti hai

हरी मिर्च की सबसे पहले पनीरी तैयार की जाती है जिसमें बरसाती मौसम में पनीरी तैयार करने का सही समय जून से जुलाई का है वह उसके बाद हम अक्टूबर से नवम्बर में पनीरी तैयार कर सकते है पनीरी वाला पोधा 30 से 40 दिन में तैयार हो है उसके बाद आप इसे खेत मे लगा सकते है जहां पर आप पनीरी तैयार करते हो वहां पर पोधो को 40 से 50 प्रतिशत छाया की आवश्यकता होती है जिससे पनीरी के लिए पोधे जल्दी से तैयार हो जाये

मिट्टी वह तापमान

हरि मिर्च की खेती लगभग सभी मिटी में कई जा सकती है जैसे कि काली मिटी, पीली मिटी, बलुई दोमट मिट्टी, रेतीली मिट्टी,
हरि मिर्च की खेती में 15 डिग्री से 35 डिग्री का तापमान अच्छा माना जाता है
अगर तापमान कम या ज्यादा होता है तो उत्पादन में कमी देखने को मिलेगी

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मिर्ची की सबसे अच्छी वैरायटी कौन सी है hari mirch ki achi kisme

किसान भाइयो हरि मिर्च की खेती अलग अलग जगह अलग अलग किस्मो का उपयोग किया जाता है क्यो की हर जगह मौसम के हिसाब से वेरायटी वह मिटी के हिसाब से वेरायटी का उपयोग किया जाता है में आपको कुछ वेरायटी के बारे में बताहूगा आप इसका चयन आपके नजदीक विशेष सलाहकार से मिलकर ही कीजिये या आपके आस पास में कोनसा बीज लगाया जा रहा है यह जानकारी के बाद ही बीज का इस्तेमाल करे जिससे आपको उत्पादन लेने में कोई परेशानी नही होगी

हरि मिर्च की किस्मे

काशी अर्ली, काशी हरिता, एच पी एच 1900 वह 2680, उजाला, यू एस 611 वह 720, तेजस्वनी, अग्नि, चेम्पियन, सूर्या, सवरना और ज्योती आदी

1. VNR सुनिधि

इसका रंग हल्का हरा होता है
लम्बाई 9 से 10 सेंटीमीटर होती है वह मोटाई 1 सेंटीमीटर होती है
इसमे तीखापन पाया जाता है

2. गोल्डन सीड्स AK 47

इसका रंग गहरा हरा होता है
लम्बाई 7 से 10 सेंटीमीटर वह मोटाई 1.1से 1.3 तक होती है
60 से 65 दिन के बाद बाजार में लेजाने के लिए तैयार हो जाती है

हरी मिर्च की खेती कैसे करते हैं

मिर्च की नर्सरी कैसे तैयार करे और फायदे

किसान भाइयों अगर आप मिर्च की खेती करना चाहते है तो आप को नर्सरी तैयार करना सही रहेगा बल्कि पोधो को खरीदने के बजाये
क्यो की अगर हम पोधो को खरीद कर लेके आते है और पोधा अच्छी वेरायटी का है तो पोधे की कीमत लगभग 1.5 रुपये से 2 रुपये तक कि होती है और लगभग एक एकड में 7500 पोधे लगते है यानिकि 11250 से 15000 तक का खर्च आ जाता है

अगर म घर पर या खेत मे ही नर्सरी तैयार करे तो हमे फायदा होगा क्यो की एक एकड़ में लगभग 80 से 100 ग्राम बीज लगता है और जिसका खर्च लगभग 5000 से 5500 तक लगता है

अगर हम घर पर नर्सरी तैयार करे तो आपको छोटी छोटी क्यारियों को तैयार कर लेना है वह जमीन बिल्कुल समतल बना ले उसके बाद जिस मिर्च का चुनाव किया है उसको क्यारियों में छिडकाव कर देंगे उसके बाद हाथ से मिटी में बीज को मिला दे उसके बाद ऊपर से मिटी को हल्के हाथों से जमा दे हल्के हाथों से जमाने पर पानी के साथ बीज ऊपर नही आएगा अगर बीज हाथ से जमाने के बाद भी ऊपर दिख रहा है तो आप हल्की हल्की मिटी छिडकाव कर दे जीससे बीज दिखे नही

उसके बाद हल्का पानी लगा दे 7 से 8 दिन में बीज अकुंरण होना शुरू हो जायेगा उसके बाद नमी के हिसाब से पानी लगाते रहे जब पोधा 1 से 1.5 माह का या 8 से 10 सेंटीमीटर का हो जाता है तो इसे खेत मे लेजाकर लगा सकते है

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खेत की तैयारी

किसान भाइयों हरी मिर्च के लिए खेत को अच्छी तरह से तैयार कर ले उसके बाद खेत मे खाद डाल दे

खेत को अच्छी तरह तैयार करने के बाद आप इसमे बेड तैयार कर ले जिससे पोधो में गलन समस्या नही आएगी

खाद वह उर्वरक

मिर्च की खेती में सबसे ज्यादा नाइट्रोजन की आवश्यकता पड़ती है इसके अलावा फास्फोरस, जिक, मैग्नेशियम, पोटाश, आयरन सल्फर जैसे कि आवश्यकता बीच बीच मे पड़ती रहती है जिससे उपज बढ़ाने में महत्वपूर्ण काम आती है

जब आप खेत की आखरी जुताई करे उस समय 200 क्विटल गोबर की खाद, डी ए पी 15 किलो पोटाश 10 किलो , करबोफ्यूरोन किलो , खेत तैयार करते समय इस्तेमाल करे

नाइट्रोजन की आवश्यकता फूल आने से पहले अधिक होती है ओर फास्फोरस से मिर्च के पोधो की जड़े मजबूत होती है साथ मे फल वह फूल के बढ़ाता है

मिर्च की पंजीरी को खेत मे कैसे लगाए

किसान भाइयों मिर्च की पंजीरी खेत मे लगाने का सही तरीका मालूम होना जरूरी है अगर हम बिना जानकारी के मिर्च का खेत मे लगा देंगे तो हमे उत्पादन में कमी आएगी

मिर्च की पंजीरी खेत मे लगाने से पहले खेत अच्छी तरह से तैयार होना आवश्यकता है उसके बाद इसमे हम बेड बना लेंगे ताकि अधिक आपी से इसकी जड़ो में गलन समस्या ना आये उसके बाद हम इसमे पानी लगा देंगे और 7 से 8 घण्टे तक बेड में नमी आने देगे

फिर जहां बेड में ऊपर की ओर नमी जानी रुक जाती है उस स्थान पर पर पंजीरी लगा देंगे जिससे इसे कम पानी मिल सके आवश्यकता अनुसार ,

मिर्च की पंजीरी खेत मे लगाने से पहले इनकी जड़ो को कार्बेंडाजीम दवा 3 ग्राम प्रति लीटर पानी मे मिलाकर उपचारित करके बॉय इससे रोगों से बचा जा सकता है

पोधो के बीच की दूरी कम से कम 15 से 18 सेंटीमीटर रखनी चाहिए वह बेड से बेड की दूरी 2 फिट रखनी चाहिए जिससे पोधो के बीच मे हवा लगे वह पोधो की रोपाई शाम के समय करनी चाहिए जिससे पौधा मूरझाये नही

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मिर्च की खेती में सिचाई

किसान भाइयों मिर्च की खेती में पहला पानी खेत मे पोधे लगाने के से पहले दे वह दूसरा पानी पोधे लगाने के बाद दे जिससे पोधे की जड़े लग जाये उसके बाद एक सप्ताह बाद पानी दे वह बाद में मिट्टी में नमी के अनुसार ओर पोधो की ग्रोथ के अनुसार पानी देना चाहिए जब पोधो के फल वह फूल लगते है उस समय पानी की अधिक आवश्यकता पड़ती है जिससे फूल जड़े नही ओर फल फूल भी अधिक लगे

खरपतवार नियंत्रण | hari mirch ki kheti me kharpatwar

मिर्च की खेती में खरपतवार पर विशेष धियान देना होगा क्यो की अगर समय समय पर खरपतवार नियंत्रित नही किया गया तो पोधे की बढ़वार कम होगी साथ मे पोधे कमजोर पड़ जायेंगे
इस लिए पानी लगाने से पहले खरपतवार को कावे/ कसी की सहायता से नष्ट कर दे वह पूरा खरपतवार वहां से उठाकर साहिड में डाल दे वह जो बेड से मिट्टी कटी वह वापिस पास में लगा दे जिससे पानी लगाते वक़्त मिर्च के पोधो की जड़े बाहर नही दिखेगी

आप पहली बार मिर्च से खरपतवार 20 से 25 दिन में निकाल सकते है उसके बाद आप लगभग 45 दिन की फसल से निकाल सकते है अगर ज्यादा खरपतवार है तो आप जब जब मिर्च में पानी लगाना चाहते हो उससे पहले खरपतवार का जरूर नष्ट कर दे साथ मे धियान दे कि खरपतवार के लिए किसी भी दवा का प्रयोग ना करे अगर आप कोई भी दवा का प्रयोग करोगे तो पोधो पर भी उसका असर होगा जिससे उपज में कमी आएगी

मिर्ची में कौन कौन से रोग लगते हैं वह मिर्च की खेती में रोग नियंत्रण hari mirch ki kheti me rog niyantran

किसान भाइयों मिर्च की खेती में समय समय पर रोगों का भी धियान रखना पडता है अगर हम समय पर रोगों पर नियंत्रण नही कर सके तो हमारे उत्पादन में कमी आएगी अगर कोई भी रोग लग जाता है तो उसको कैसे पहचाने ओर कोनसी दवा का इस्तेमाल करे आइये जानते है

पत्ति धब्बा रोग

यह रोग मिर्च के नीचे वाले पतो से शुरू होता है ओर धीरे धीरे ऊपरी पतो में देखने को मिलेगा इसके नियंत्रण के लिए कसुगामाईसिन 5% + कॉपर ऑक्सिक्लोराइड 45% WP का इस्तेमाल करें इसको आप 300 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से इस्तेमाल कर सकते है

इसके अलावा आप कसुगामाईसीन 3% SL अकेले का इस्तेमाल कर सकते है इसके लिए आपको 400 ग्राम प्रति एकड़ की दर से दवा का इस्तेमाल कर सकते है

थ्रिप्स रोग

यह छोटे छोटे किट पतियों वह तनो के मुलायम भागो से रस चुस्ते है जिससे पतिया सिकुड़कर छोटी हो जाती है तथा ऊपर की ओर मुड़ने लग जाती है ओर पतिया खराब होकर नीचे गिर जाती है जिससे फसल को काफी नुकसान होता है क्योकी पोधो को समय पर ऊर्जा ना मिलने के कारण पौधा खराब हो जाता है
इसका बचाव करना बहुत जरूरी है तो इसके बचाव के लिए आप प्रोफेनोफॉस 50% EC, 50ml 15 लीटर पानी मे ओर डाइफेथीयूरान 50% , 25 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी मे घोल बनकर खड़ी फसल में छिडकाव करे

तथा इसके अलावा आप स्पाईरोमेसिफेन 240 SC , 25ML प्रति 15 लीटर पानी मे मिलाकर छिडकाव करे

सफेद मखी

यह किट पतियों के निचली सतह से रश चूसते है जिससे पतिया सिकुड़ जाती है वह पीली पड़ जाती है इसके बचाव के लिए आप इमिडा क्लोपरिड 200 SL दवा का छिड़काव करे इसके लिए आपको 30 ml दवा में 15 लीटर पानी मिलाकर छिडकाव करे
इसके अलावा आप पायरीप्रोक्सीफेन 10% EC दवा का उपयोग करे इसके लिए आपको 50 ML दवा को 15 लीटर पानी मे घोल बनाकर छिडकाव करे

मकड़ी

यह पतियों के निचली सतह से रस चुस्ती है जिससे पतिया काली पड़ जाती है इसके बचाव के लिए प्रॉपरजॉइंट 57% EC दवा का इस्तेमाल करे इसके लिए आपको 40ML दवा को 15 लीटर् पानी मे घोल बनाकर छिडकाव करे
इसके अलावा आप स्पाईरोमेसिफेन 240 SC , 13ML प्रति 15 लीटर पानी मे मिलाकर छिडकाव करे

मिर्च के पोधो में लगने वाला उकठा रोग

इस रोग में मिर्च के पोधो की जड़े सूखने लग जाती है वह धीरे धीरे पूरा पौधा सुख जाता है
इसके बचाव के लिए आप कार्बोफ्यूरोन 3% CG को 50 ML दवा तथा मेंनकोजेब 75% WP को 70 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी मे मिलाकर इस्तेमाल करे

इसके अलावा आप फिपरोनिल 6 ग्राम प्रति एकड़ वह करटोप हाइड्रोक्लोराइड 4% GR दवा 8 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से बिजाई करे

फफूंद से होने वाले रोग

फफूंद रोग से फल गलन समस्या आ जाती हैं तने का सडना, पतियों में धब्बे नुमा आकृति बनकर पतियों का सडना, इस तरह के रोग फफूंद रोग होते है यह मिर्च की फसल में लग जाने से फसल को कमजोर बना देती

इसके बचाव के लिए टेबुकोनाजोले 50% + ट्राईफलोकसी स्ट्रोबिन 25% WG को 20 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी मे मिलाकर छिडकाव करे

मिर्च का एंथ्रेक्नोज

इस रोग से पतियों की किनारियों पर धब्बे पड़ने शुरू हो जाते है तथा पतिया सूखने लग जाती है वह जिस कारण प्रकाश संश्लेषण की किर्या में समस्या आती है वह पोधे अपना भोजन नही बना पाते इसके अलावा फलो पर काले रंग के गोल धब्बे बनते है धीरे धीरे फल में धब्बे अधिक हो जाते है वह फल खराब होकर गिर जाता है जिससे फल में भी कमी आ जाती है

इसका बचाव करना बहुत जरूरी है इस लिए इसके बचाव के लिए कार्बेंडाजीम 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिडकाव कर सकते है

मिर्च में फल सडन

मिर्च में फल सडन समस्या आने पर मिर्च में काफी भारी नुक्सान होता है यह समस्या फल पकने के बाद आता है जिसमे फल सड़ने लग जाता है

इसके बचाव के लिए धियान देना होगा कि जब भी बीज बोये वह रोगमुक्त हो,वह केप्टान की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति किलो के हिसाब से उपचारित करे वह पानी की निकासी भी सही होनी चाहिए अगर पानी अधिक हो तो निकाला जा सके।
इसके अलावा आप मेकोजेब 2.5 ग्राम,या कॉपर ऑक्सिक्लोराइड 3 ग्राम या प्रोपिकोनजोल 1मिली, या एजोकसीसट्रोबिन 1 मि.ली.प्रति लीटर पानी मे घोल बनाकर 3 स्प्रे करे
जिसमे से पहली सप्रे फूल आने से पहले करे
दुसरा फल बनते समस्य वह तीसरी स्प्रे दूसरे सप्रे से 35 दिन बाद करे करे

फूलों का झड़ना

पोधो में फूल जड़ने के कई कारण होते है जिसकी वजह से पोधो से फूल जड़ जाते है वह उत्पादन में अधिक नुकसान होता है अगर मोसन बदल रहा है तो भी फूल जड़ जाते है अगर पानी की कमी होगी तो भी फूल झड़ने लग जाते है
अन्य भी कारण हो सकते है लेकिन इसका समय पर उपचार करना बहुत आवश्यकता हो जाता है जिससे उत्पादन में कमी ना आये इसके उपचार के लिए आप नेथलीन एसीटिक एसिड का छिड़काव दुकानदार से पूछकर करे

मिर्च में उत्पादन

किसान भाइयों मिर्च की किस्मो के अनुसार अलग अलग उत्पादन प्राप्त होता है मिर्च की पहली तुड़वाई 55 से 60 दिन में की जाती है उसके बाद अगर अच्छी देखभाल की जाए तो एक सप्ताह में 2 बार मिर्च की तुड़वाई की जा सकती है अगर मिर्च के उत्पादन की बात करे तो एक एकड़ में 65 से 75 क्विटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है और् संकर किस्मो से 250 से 300 क्विटल प्रति एकड़ का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है

ओर लाल मिर्च 12 से 14 क्विटल प्राप्त की जा सकती है शुरू शुरू में कच्ची मिर्च को तोड़ना चाहिए जिससे पोधो के ज्यादा फल लगे उसके बाद आप मिर्च को पकने के बाद तोड़ सकते है और फिर धूप में सुखा दे जिससे अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जाता है

मिर्च की खेती से लाभ | hari mirch ki kheti ke fayde

मिर्च की खेती अनेक प्रकार के व्यजनो में किया जाता है जिस कारण मिर्च की खपत बहुत ज्यादा होती है ओर बाजार में भी अधिक तेजी से बिक जाती है जिससे किसानों को भी अच्छा उत्पादन प्राप्त हो जाता है

प्रशन- मिर्च का बीज कितने दिन में अकुंरण हो जाता है

उतर- मिर्च का बीज 7 से 8 दिन में अकुंरण होता है
अकुंरण के लिए नमी का होना आवश्यक है

प्रशन- मिर्च की खेती कितने दिन की होती है

उतर- मिर्च की खेती अगर सही तरीके से की जाये तो यह 9 से 10 माह की खेती होती है

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निष्कर्ष –

किसान भाइयों मेने इस आर्टिकल में हरी मिर्च की खेती के बारे में सभी जानकारी देने की कोसिस की है जिससे आपको कब मिर्च लगानी चाहिए कब तुड़वाई की जाती है कितना उत्पादन होता है अगर भीर भी कोई जानकारी नही दे सका तो आप कोमेंट करके बता सकते हूं जिससे वह जानकारी भी इसमे जोड़ दि जाएगी जिससे कोई भी किसान अगर मिर्च की खेत करे तो उसे यहां से पूरी अच्छी तरह जानकारी मिले।
अगर आपको कोई जानकारी समज नही आ रही तो आप मुझे कॉमेंट करके बता सकते है साथ मे आपको यह आर्टिकल कैसा लगा प्लीज आप कॉमेंट करके बताये जिससे मनोबल बड़े ओर अन्य फसल पर भी आर्टिकल लिखकर आपका सहयोग कर सकू

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कुलवंत सिंह भाटी
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम कुलवंत सिंग भाटी है। मैं आपको किसान समाधान ब्लॉग पर खेती, फसलों, कृषि यंत्रो, खाद तथा किसानों के लिए आने वाली योजनाओं से जुड़ी सारी जानकारी शेयर करता हूँ।
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