लहसुन की खेती से अच्छी कमाई कैसे करें | Lahsun Ki Kheti Ki Jankari

lahsun ki kheti ki jankari

किसान भाइयो क्या आप लहसुन की खेती करना चाहते हैं अगर आप लहसुन की खेती करते हो तो आप भी लाखो रुपये कमा सकते हैं मेने भी मेरे खेत मे लहसुन की खेती की है और लाखों रुपये की आय प्राप्त की है लहसुन की खेती को अगर सही तरीके से करे तो ज्यादा मेहनत की आवश्यकता नही पड़ती मेने आप ने लहसुन की खेती की है इस कारण लहसुन की खेती के बारे में अच्छी तरह से वाकिफ हु जिससे आपको भी हर सलाह आसानी से वह सही तरीके से दे सकता हु तो आइये हम लहसुन की खेती के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते है वह इसमे कितना खर्चा आयेगा ओर कितनी इनकम होगी सभी जानकारी ( lahsun ki kheti ki jankari ) प्राप्त करते है

मिट्टी वह जलवायु

लहसुन सर्दी को सहनशील होता है लेकिन पोधो की अच्छी बढ़वार के लिए आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है
कन्दों के परीपकव के लिए शुष्क जलवायु अच्छा रहता है
वह लहसुन की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है

लहसुन की खेती का समय
lahsun ki kheti kab ki jaati hai

लहसुन की खेती सितम्बर से नवम्बर तक कि जा सकती है

जरूर पढ़ें : गर्मी में कौन-कौन सी फसल होती है

लहसुन की किस्मे lahsun ki kisme

किसान भाइयों लहसुन की बुवाई करने से पहले उन्नत किस्मो का चुनाव करना बहुत आवश्यक होता जिसके आधार पर ही आप अच्छी खेती कर सकते है क्यो की हर जगह अलग अलग किस्मे का उत्पादन होता हैं

◆ लहसुन की छोटे दिन की अवधि वाली किस्मे

जी 1, जी 41, जी 282, बीमा ओमकार, बीमा पर्पल, जी जी-2, जी जी-3, जी जी – 4,

◆ उतर भारत के लिए लहसुन की किस्मे

जी 1, जी 41, जी 282, बीमा ओमकार, बीमा पर्पल

◆ पहाड़ी क्षेत्र के लिए लहसुन की किस्मे

वी एल जी 1, वी एल जी- 2, एग्री फॉन्ट पार्वती(जी 323), एग्री फॉन्ट पार्वती -2

■ लहसुन की कुछ अन्य किस्मे

1.एग्री फाउंड व्हाइट (जी 41)

यह वेरायटी मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र के किसानों के लिए अच्छी है
इसका रंग सफेद होता है
इसकी कलिया बड़ी होती है
इसकी फसल अवधि 150 से 190 दिन की है
इसकी उपज 50 से 60 क्विटल है

2. यमुना सफेद (जी1)

इसे पूरे भारत के किसान लगा सकते है
इसकी कलिया मध्यम से बड़ी होती है
फसल अवधि 150 से 190 दिन की होती है
इसकी उपज 60 से 65 क्विटल होती है
इसको लम्बे समय के लिए घर पर रख सकते है

3. एग्री फाउंड व्हाइट (जी 313)

यह किस्म कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, पहाड़ी क्षेत्र के लिए है
यह सफेद रंग के छिलके वाली किस्मे होती है
इसकी कलिया बड़ी होता है
इसकी अवधि 165 से 175 दिन की होती है
इसकी औसतन पैदावार 65 से 75 क्विटल होती है

4. यमुना सफेद 5

इनकी कलियों का रंग सफेद होता है
इसकी कली मध्यम से बड़ी होती है
यह 140 से 160 दिन में तैयार हों जाता है
इसकी पैदावार 60 से 70 क्विटल होती है

5. ऊटी 1

इसकी कलिया बड़ी होती है
120 दिन से 130 दिन में यह पककर तैयार हो जाती है
60 से 65 क्विटल/ प्रति एकड़

6. एग्री फाउंड पार्वती

यह सफेद छिलके वाली होती हैं
इसकी फसल की अवधि 120 से 130 की होती है
इसकी औसत पैदावार 175 से 225 क्विटल होती है

7. यमुना सफेद 1

यह सफेद छिलके वाली होती है
इसका आकार मध्यम होता है
इसके एक कन्द में 25 से 30 कलिया होती है
एक हेक्टेयर में 150 से 175 क्विटल होता है

8. सफेद यमुना 2 ओर 3

यह सफेद वह बड़े आकार के कन्दो की किस्मे है
इसकी पत्तियां चोडी होती है
इसके एक कन्द में 15 से 16 बड़े आकार की कलिया होती है

जरूर पढ़ें : केसर की खेती कैसे की जाती है

खेत की तैयारी

लहसुन की खेती के लिए खेत को अच्छी तरह मिट्टी पलटने वाले हल से 2 से 3 तैयार कर ले
उसके बाद पाटा लगाकर खेत तो समतल कर दे
लहसुन के लिए खेत मे छोटी छोटी क्यारियां बना ले जिससे पानी लगाने में समस्या नही आएगी
उसके बाद लहसुन को खेत मे चोप दे लहसुन की गांठ से एक एक कलिया अलग करके फिर क्यारियों में चोप दे
लहसुन को 15 सेमी कतार से कतार की दूरी पर वह पोधो से पोधो की दूरी 8 सेमी के अंतराल पर रोपाई करे

सिंचाई

लहसुन की खेती में पहली सिंचाई लहसुन लगाने के तुरत बाद करनी चाहिए
उसके बाद हर 15 दिन के अंतराल पर या आवश्यकता अनुसार करनी चाहिये
लहसुन पटाई के 15 से 20 दिन पहले सिचाई बन्द कर दे जिससे लहसुन ज्यादा समय तक चलेगा सडन समस्या नही आएगी

उर्वरकों का प्रयोग

लहसुन की खेती से अच्छी पैदावार लेने के लिए खाद वह उर्वरक का उपयोग करना जरूरी है जिससे लहसुन की बढ़वार जल्दी वह अच्छी होगी

नाइट्रोजन 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
फास्फोरस 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
पोटाश 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
सल्फर 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर

नॉट नाइट्रोजन की मात्रा एक साथ नही डालनी

लहसुन में पहला पानी लगाते समय 35 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
उसके बाद 30 दिन की फसल में 35 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
फिर 45 दिन की फसल में 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर

जरूर पढ़ें : जैविक खाद बनाने की विधि क्या है

लहसुन की खेती में खरपतवार नियंत्रण lahsun ki kheti me kharpatwar

किसान भाइयों आपको लहसुन की खेती में खरपतवार पर विशेष ध्यान देना होगा क्यो की समय समय पर अगर खरपतवार नियंत्रण नही किया गया तो लहसुन कमजोर पड़ जायेंगा।
लहसुन में जब भी पानी लगाये उसके 4 से 5 दिन बाद आप खुरपी की सहायता से सभी खरपतवार को निकाल दे जिससे मिट्टी भी मुलायम हो जायेगी और लहसुन की गांठे भी बड़ी बन जायेगी ध्यान रखे कि लहसुन की खेती में खरपतवार नियंत्रण के लिए आप कोई दवा का उपयोग ना करे।

खरपतवार नियंत्रण से बचने के लिए आप अपने खेत मे पराली बिछा सकते है इसके लिए जब भी आप खेत में लहसुन की रोपाई करते हैं रोपाई करने के बाद वह लहसुन उगने से पहले पूरे खेत मे पराली बिछा दे।

लहसुन अपने आप पराली के अन्दर से बाहर निकल आयेगा पराली बिछा देने से आपकी खरपतवार समस्या जड़ से समाप्त हो जायेगी जिससे आपकी मजदूर की बचत होगी और उसके अलावा मिट्टी मुलायम रहेगी ठोस नही होगी जिसकारण लहसुन अच्छा चलेगा

ओर उसके अलावा आपको पानी कम लगाना पडेगा क्यो की पराली की वजह से भूमि पर धूप नही जा पायेगी जिससे मिट्टी में नमी बनी रहेगी

लहसुन की खेती में रोग नियंत्रण lahsun ki kheti me rog niyantran

1. एडिफ माइट्स

इस रोग में लहसुन के पते मूड जाते है और एक दूसरे के अन्दर गुस जाते है
इसके बचाव के लिए डाईकोफ़ोल 2मिली दवा प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें

2. लहसुन का पीलापन

लहसुन में पीलापन कई कारणों से होता है जिसमे अगर लहसुन की पत्तियां नीचे से पीली होनी शुरू हो जाये और ऊपर की ओर बढ़ती जाए तो वह नाइट्रोजन की कमी के कारण होता है इसके नियंत्रण के लिए NPK 19:19:19
का 6 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से स्प्रे करे यह NPK पानी मे तुरन्त घुलनशील होता है

अगर लहसुन ऊपर से पिला होना शुरू हों जाता है और नीचे की ओर बढ़ता है तो सल्फर तत्व की कमी के कारण होता है तो इसके नियंत्रण के लिए आप सिचाई के साथ 3 से 5 kg ( 80% WDG ) सल्फर प्रति एकड़ के हिसाब से दे या आप इसकी 2 ग्राम / प्रति लीटर ले हिसाब से स्प्रे करे

लहसुन की पत्तियां को ऊपरी हिस्से पिल्ले पड़कर सुख जाते है यह पोटाश तत्व की कमी के कारण होता है इसे टीपबर्न या मार्जिनल सकोचिग कहते है
इसके नियंत्रण के लिए NPK 19:19:19 या NPK 0:52:34 या NPK 0:0:50 का 6 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करे

3. कन्द का सडना

यह समस्या ज्यादा समय पानी खड़े रहने के कारण होता है इससे बचने के लिए बुवाई से पहले ही कलियों को 2 ग्राम यू पी एल साफ से प्रति किलो के हिसाब से उपचारित करे

खड़ी फसल में रोग आने पर 1 से 1.5 किलो कॉपर ऑक्सि क्लोराइड प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन में सिचाई के साथ देवे

जरूर पढ़ें : ग्वार की खेती कैसे करें सारी जानकारी

लहसुन की पटाई

जब लहसुन 50 प्रतिशत सुख जाए जब आप इसे निकाल सकते है लहसुन निकालने के 15 दिन पहले पानी को बंद कर दे

लहसुन की खेती में खर्च वह उपज

दोस्तो अगर आप लहसुन की खेती करते है तो आपको मालूम ही होगा कि कितना खर्चा आता है अगर नही मालूम तो में आपको एक आइडिया/ अंदाजा बता देता हूं उसके हिसाब से आपका खर्च आएगा
में आपको 1 बीघा के हिसाब से खर्च बताहूगा

1500 रुपये बुवाई खर्च
5000 से 7000 रुपये लहसुन रोपाई खर्च
5000 से 6000 DAP, पोटाश, सुपर, जिक, NPK, आदी
12000 से 13000 लहसुन बीज 1 बीघा में 1 क्विटल
2000 रुपये लहसुन पटाई
1000 लहसुन की साफ सफाई
4000 से 5000 अन्य खर्च

कुल खर्च 30500 से 34500 रुपए लगभग

उपज लगभग 2 लाख से 2.50 लाख रुपये

1.70 लाख से 2.15 लाख रुपये तक शुद्ध आय मिलती है

लहसुन का उपयोग

लहसुन का उपयोग मसालों में किया जाता है लहसुन में एक वाष्पशील तेल पाया जाता है जो कि विभिन बीमारियों को ठीक करने में उपयोग किया जाता है लहसुन में कार्बोहाइड्रेट, केल्सियम, प्रोटीन, फास्फोरस, आदि प्रचुर मात्रा में पायी जाती है
लहसुन का उपयोग लहसुन के आचार, लहसुन की चटनी, लहसुन का पाउडर, लहसुन का पेस्ट आदि में उपयोग किया जाता है

जरूर पढ़ें : सफेद मूसली की खेती कैसे करते हैं?

Default image
कुलवंत सिंह भाटी
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम कुलवंत सिंग भाटी है। मैं आपको किसान समाधान ब्लॉग पर खेती, फसलों, कृषि यंत्रो, खाद तथा किसानों के लिए आने वाली योजनाओं से जुड़ी सारी जानकारी शेयर करता हूँ।
Articles: 129

Leave a Reply