गर्मी में पालक की खेती कैसे करें? Garmi me Palak Ki Kheti Kaise Karen.

गर्मी में पालक की खेती ( Palak ki kheti )

किसान भाइयों क्या  आप भी पालक की खेती करने की सोच रहे है अगर सोच रहे है तो आप सही सोच रहे हो क्यो की आप पालक की खेती करके बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं साथ मे पालक की खेती करनी भी आसान है इसमें कम समय मे अच्छा फायदा हो जाता है तो हम आपको बताएंगे की आप किस किस क़िस्म का चयन करें और क्या विषेस ध्यान रखे

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पालक की खेती की जानकारी ( palak ki kheti ki jankari )

हम पालक की बात करे तो इसकी मांग बाजार में वर्ष भर रहती है  जिससे  बहुत कम समय मे किसान पालक की खेती से अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं। खेती बाड़ी में कई ऐसे विकल्प है जिससे किसान लाखो की कमाई कर सकते हैं लेकिन हम पालक की बात करे तो वह एक ऐसी सब्जी है जिसे हम पूरे साल खाते हैं।

भारतीय ब्यंजनों में पालक की एक अहम भुमिका है पालक पनीर सब्जी एक अपना स्वाद बढ़ाते हैं। यदि इसका बिजनेस करते है तो काभी फायदा होता है पालक की खेती  देश के लगभग सभी भागों में रबी, खरीफ, जायद तीनो मोसम में इसकी खेती  की जाती है पालक की किस्मो का चयन मौसम के अनुसार करना चाहिए

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पालक 2 प्रकार की होती है

1. देशी पालक : देशी पालक की पतिया चिकनी अंडाकार छोटी वह सीधी होती है

2.विलायती / विदेशी पालक : विलायती पालक की पतियो के सिरे कटे हुए होते हैं

देशी तथा विलायती दोनों प्रकार की पालक अलग अलग क्षेत्र  में उगाई जाती है

1. देशी पालक में 2 वेरायटी होती है

◆ लाल सिरा वाली

◆ हरि सिरा वाली

हरि सिरा वाली को किसान अधिक पसन्द करते हैं या उगाते है

2. विलायती / विदेशी पालक  में 2 वेरायटी होती है

◆ कटीली पालक

◆ गोल बीज पालक

कटीली पालक : इन्हें पहाड़ी  क्षेत्रों में वह ठंडे क्षेत्रों में ज्यादा उगाई जाती है

गोल बीज पालक : गोल बीज वाली  पालक मैदानों में उगाई जाती है

पालक की किसमे ( Palak ki Kisme)

1. आल ग्रीन

2. पूसा पालक

3. पूसा हरित

4. पूसा ज्योति

5. जोबनेर ग्रीन

6. बनर्जी जाइट

7. हिसार सलेक्शन 23

8. पालक नंम्बर 51-16

9. लाग स्टेडिंग

10. पन्त कम्पोजिटी

11. पूसा भारती

नोट – पूसा भारती प्रमुख हैं क्यो की यह कही बार कटाई देती है।

गर्मी में पालक की खेती कैसे करें | Garmi me Palak Ki Kheti Kaise Karen

दोस्तो अगर आप भी गर्मी में पालक की खेती करने के बारे में सोच रहे है तो हम आपको स्टेप बाय स्टेप पालक की खेती के लिए जमीन तैयार करने से लेकर, पालक की खेती कैसे करें इससे जुड़ी सारी जानकारी नीचे देने वाले है।

पालक की खेती का समय ( palak ki kheti kab ki jaati hai )

पालक रबी की फसल है इसलिए यह ठण्डे मोसम की खेती है इसको ठंडे स्थानों पर सफ़लता पूर्वक ऊगा सकते हैं
गर्म मौसम में इसके पोधे बढ़वार नही करते लेकिन पानी की सही व्यवस्था होने पर गर्मी में भी पालक की खेती कर सकते है पालक की खेती हम अक्टूबर नवम्बर दिसम्बर में बुवाई की जा सकती है इसके बाद फरबरी मार्च में भी लगाया जा सकता हैं

पालक की खेती में बीज की मात्रा

पालक की बुवाई में 30 कोलो प्रति हेक्टेयर बीज की आवश्यकता पड़ती है, ओर पालक की  छिड़काव विधि से 40 से 45 किलो प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता पड़ती है।

पालक की खेती के लिए खेत की तैयारी | ( Palak ki Kheti Kaise Hoti Hai )

पालक की खेती के लिये जीवाश युक्त्त बालुई दोमट मिटी,या मटियार मिटी या दोमट मिटी सबसे उपयुक्त होती है  इस प्रकार की मिटी में पालक के पोधे बढ़वार अच्छी  लेते हैं पालक की खेती अमलीय मिटी में नही बढते जबकि क्षारीय मिटटी में अच्छी पैदावार की जाती है अच्छी पैदावार का मतलब ह की पेड़ अच्छा ग्रोथ करेगा रोग भी कम लगेंगे

खेत की पहली जुताई मिटटी पलटने वाले हल से करनी चाहिये उसके बाद 2-3 बार कल्टीवेटर से करनी चाहिए जिससे खेती की मिट्टी भूरभूरी हो जाये उसके बाद गोबर की खाद 20 टन प्रति हेक्टेयर के हिसाब से डाल देनी है

आप इसमें वर्मी कम्पोस्ट खाद 8 टन प्रति हेक्टेयर के हिसाब से डालनी है, उसके बाद एक बार ओर कल्टीवेटर से जुताई कर देनी है  ताकि खाद मिटी में मिल जाये उसेक बाद पट्टा/सुवगा लगा देना चाहिए।

पालक की बुवाई कैसे करे

पालक के बीज की मात्रा 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर प्राप्त होती है पालक की बुवाई करते समय कतार से कतार की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर ओर बीज से बीज की दूरी 7 से 10 सेंटीमीटर होनी चाहिए। पालक की बुवाई के बाद हल्की सिचाईं करनी चाहिए इसके  बाद  पालक  की खेती  में  सिचाईं की  अधीक आवश्यकता होती है।

पालक की खेती करने का तरीका
(palak ki kheti kaise hoti hai)

  1. पालक की खेती के लिये जीवाश युक्त्त बालुई दोमट मिटी,या मटियार मिटी या दोमट मिटी सबसे उपयुक्त होती है  इस प्रकार की मिटी में पालक के पोधे बढ़वार अच्छी  लेते हैं पालक की खेती अमलीय मिटी में नही बढते जबकि क्षारीय मिटटी में अच्छी पैदावार की जाती है अच्छी पैदावार का मतलब ह की पेड़ अच्छा ग्रोथ करेगा रोग भी कम लगेंगे
  2. खेत की पहली जुताई मिटटी पलटने वाले हल से करनी चाहिये उसके बाद 3-4 बार कल्टीवेटर से करनी चाहिए जिससे खेती की मिट्टी भूरभूरी हो जाये
  3. उसेक बाद पट्टा/सुवगा लगा देना चाहिए
  4. पालक की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी में कंपोस्ट खाद या गली सडी खाद मिला देनी चाहिए
  5. पालक के बीज की मात्रा 40-45 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर प्राप्त होती है
  6. पालक की बुवाई के बाद हल्की सिचाईं करनी चाहिए
  7. इसके बाद पालक की खेती में अधीक आवश्यकता होती है आवश्यकता अनुसार सिचाईं करते रहना चाहिए
  8. पालक की खेती के 20 से 25 दिन बाद निराई गुड़ाई करनी चाहिए  उसके बाद खरपतवार के अनुसार गुडाई करनी चाहिए
  9. पालक की खेती में साधारणतय रोग नही आता
  10. यदि होता ह तो बीज को उपचारित करके बोना चाहिये
  11. रोकथाम के लिए 0.2 प्रतिशत बलाईटाक्स 2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से हर 15 दिन के हिसाब से छिड़काव करना चाहिये
  12. पालक को माहू, बीटल ओर केटरपिलर  किट फसल को नुकसान पहुचते है इनकी रोकथाम  के लिए 1 लीटर एल्ड्रिन या मेलाथियान को 700 – 800 लीटर पानी मे मिलाकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए
  13. इसके साथ मेथायल 1.5 लीटर 700-800 लीटर पानी मे मिला कर  प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए

गर्मी में पालक की खेती करने के बारे में विडियो देखें

पालक की फसल में में सिचाईं

पालक के बीज के अकुंरण के लिए नमी की आवश्यकता होती है नमी की कमी महसूस होने पर हल्की सिचाईं करे
बीज अकुंरण के बाद गर्मी के मौसम में हर सप्ताह सिचाईं की आवश्यकता पड़ती है ठंड या सर्द मोसम में 12 से 13 दिन में सिचाईं की आवश्यकता पड़ती है

गर्मी में पालक की खेती में खरपतवार नियंत्रण

पालक की खेती के 20 से 25 दिन बाद निराई गुड़ाई करनी चाहिए  उसके बाद खरपतवार के अनुसार गुडाई करनी चाहिए

पालक की खेती में रोग नियंत्रण कैसे करें

साधारणतय पालक की खेती में रोगों का प्रभाव नही पड़ता है, यदि होता है तो बीज को उपचारित करके बोना चाहिये। रोकथाम के लिए 0.2 प्रतिशत बलाईटाक्स 2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से हर 15 दिन के हिसाब से छिड़काव करना चाहिये।
पालक को माहू / मोयला/ चेपा,  बीटल ओर केटरपिलर  किट फसल को नुकसान पहुचते है माहू पतियो का रस चूसता है पतिया पीली पड़ जाती है   इनकी रोकथाम  के लिए 1 लीटर एल्ड्रिन या मेलाथियान को 700 – 800 लीटर पानी मे मिलाकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए

पालक की खेती में कटाई / पैदावर /बचत

पालक की बुवाई के 4-5 सप्ताह बाद कटाई शुरू हो जाती है  कुल 5 – 6  बार कटाई की जाती है
पालक की अच्छी किस्म की बुवाई के बाद पैदावार/ उपज 90 से 120 क्विटल प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए
पालक की खेती में कम से कम कमाई 25000 से 30000 तक कर सकते हैं

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पालक की खेती में उत्पादन :

पालक की कटाई कोमल वह रसीली अवस्था मे करनी चाहिए पकने ना दे ताकि बाजार में अच्छी आय प्राप्त  मिल सके पालक की अच्छी किस्म की बुवाई के बाद पैदावार/ उपज 90 से 120 क्विटल प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए
पालक की खेती में कम से कम कमाई 25000 से 30000 तक कर सकते हैं

पालक के खेती के फायदे | Palak ki Kheti ke Fayde

  1. पालक की खेती खारे पानी मे भी की जा सकती है
  2. पालक में विटामिन A पाया जाता है
  3. पालक में लोहा पाया जाता है जिससे शरीर मे  लोहे की कमी को पूरा करती है
  4. पालक में खनिज लवण की मात्रा पाई जाती है
  5. पालक में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है
  6. पालक केंसर रोधि में लाभफायक है
  7. पालक एंटी एजिंग दवाइया बनाई जाती है
  8. पालक से रतौन्धी रोग नही होता
  9. पालक में ऑक्जेविक अम्ल की अधिकता पाई जाती है

पालक के जूस के फायदे | Palak ke Juice ke Fayde

  1. पालक के जूस से गर्भवती महिलाओं में आयरन की कमी नही होने देता
  2. कब्ज जैसी बीमारी से बचाता है
  3. थायराइड की समस्या में लाभफायक है
  4. पालक में काभी मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है ये हमारी हडियॉ को मजबूती देता है
  5. पालक के सेवन से बाल झड़ने बन्द हो जाते हैं
  6. पालक के जूस  से आँखों की बीमारीया नही लगती
  7. रोजाना पालक के जूस पीने से ब्लड प्रेशर कम करता है
  8. पालक के जूस पीने से केंसर कोशिका भी कम हो जाती है

निष्कर्ष –

पालक की खेती से जुड़ी जानकारी हमने इस आर्टिक्ल में विस्तार से बताई है। अगर आप भी पालक की खेती करना चाहते है तो आपको यह आर्टिक्ल पढ़कर समझ में आ जाएगा की आप किस प्रकार गर्मी में भी पालक की खेती कर सकते है और पालक की खेती की कौन कौनसी किस्में होती है।

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कुलवंत सिंह भाटी
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