भिन्डी की खेती, Bhindi ki Kheti Kaise Ki Jaati Hai

भिंडी की खेती /bhindi ki kheti

भिन्डी की खेती, Bhindi ki Kheti Kaise Ki Jaati Hai

हम हरि सब्जी की बात करे तो बाजार में भिन्डी की माग अधिक रहती है क्यो की इसे लोग ज्यादा पसंद करते है
इसलिए खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा होता है
आप इसकी खेती करते है तो आपको एक एकड़ में 30-40 हजार रुपये 3 महीने में कमा सकते है इससे ज्यादा भी मुनाफा कमा सकते है इसके लिए आपको तकनीकी चुनाव ओर कुछ विशेस बातो का दियान रखना होगा आइये इसके बारे में विस्तार से जानते है

भिंडी की खेती की जानकारी

bhindi ki kheti ki jankari

भिन्डी को लेडीज फिगर भी कहा जाता है कुछ जगह इसे ओकरा के नाम से भी जाना जाता है भिन्डी बरसात ओर गर्मी में बोई जाने वाली सब्जी है भारत के लगभग सभी राज्य में भिन्डी की फसल उगाई जाती है
भारत में कुल हरि सब्जी का 60% भिन्डी का होता है क्यो की इसकी बाजार में अच्छी माग रहती है इसके लिए आपको अच्छी प्रजाति का उपयोग करना होगा

भिन्डी की उन्नत किस्मे
bhindi ki unnat kisme

1. पूसा A-4
2. आरका अनामिका
3. परभनी क्रांति
4. पंजाब 7
5. राधिका
6. हिसार
7. काशी विभूति
8. काशी प्रगती
9. काशी क्रांति

पूसा A-4

यह एक बहुत अच्छी वेरायटी है यह उन्नत किस्म है
यह एपीड़ ओर जेसड की प्रतिरोधी है
यह पित रोग रोधि किस्म है
इसके फल माध्य्म आकार के गहरे हरे रग के होते हैं
बोने के लगभग 15 दिन बाद फूल आने शुरू हो जाते हैं
पहली तुड़वाई 45 से 50 दिन में शुरू हो जाती है
इसकी पैदावार ग्रीष्म ऋतु में 10 से 12 टन प्रति हेक्टेयर ओर खरीफ में 15 से 20 टन प्रति हेक्टेयर होती है

आरका अनामिका

आरका अनामिका पोधे बड़े वह अच्छे होते है
मार्च से जून ओर जुलाई से सितंबर में बुवाई की जा सकती है
भिन्डी की लंबाई 10 से 15 सेंटीमीटर वह 5 किनारी वाली होती है
इसकी तोड़ाई 40 से 45 दिन में शुरू हो जाती है
बीज की मात्रा 8 से 10 किलो प्रति हेक्टेयर होती है
इसकी पैदावार 75 से 100 क्विटल प्रति हेक्टेयर होती है

परभनी क्रांति

यह भी पित रोग रोधी किस्म है
इसमे फल बुवाई के लगभग 50 दिन बाद शुरू हो जाते हैं
इसके फल गहरे हरे रंग के ओर 15 से 18 सेंटीमीटर लम्बे होते हैं
इसकी पैदावार 12 से 15 टन प्रति हेक्टेयर होती है

पंजाब 7

 इसमे 50 से 55 दिन बाद फल आने शुरू हो जाते हैं
 इसकी औसत पैदावार 8 से 12 टन प्रति हेक्टेयर होती है

राधिका

राधिका इसकी बुवाई गर्मी और सर्दी भी कर सकते है वैसे गर्मी में फरवरी – मार्च ओर ओर बरसात में जून -जुलाई बढ़िया समय है
राधिका भिंड़ी की लंबाई मध्य्म होती है
इसकी पहली तुड़वाई 50 दिन में होती है

हिसार

यह किस्म चौधरी चरण सिंह क्रषि विस्व विद्यालय द्वारा निकाली गई है
इसके पोधो की ऊँचाई 80 से 120 सेंटीमीटर होती है
पहली तुड़वाई 45 से 50 दिन में शुरु हो जाती है
इसकी पैदावार 12 से 18 टन प्रति हेक्टेयर है

काशी विभूति

काशी विभूति में 40 से 45 दिन में फूल आना सुरु हो जाता है
इसका औसत उत्पाद 150 क्विटल प्रति हेक्टेकर होता है

काशी प्रगती

काशी प्रगती में फूल आने का समय 38 से 40 दिन का है
इसका औसत उत्पादन 160 से 175 क्विटल प्रति हेक्टेकर होता है

काशी क्रांति

काशी क्रांति में फूल आने का समय 40 से 45 दिन है
इसकी उत्पादन छमता बरसात के समय मे 160 क्विटल प्रति हेक्टेकर है
इसके पोधे 100 से 120 सेंटीमीटर ऊँचे होते हैं

भिंडी की खेती का समय
bhindi ki kheti ka time

भिन्डी को बौने के लिए गर्म वातावरण वह नम वातावरण होना चाहिए क्योकि भिन्डी के बीज को अंकुरण के लिए तापमान 27 डिग्री से 30 डिग्री होना आवश्यक माना जाता है भिन्डी की बुवाई के लिए फरबरी – मार्च का महीना अच्छा माना जाता है
(भिन्डी की खेती, Bhindi ki Kheti Kaise Ki Jaati Hai )

भिंडी बोने का तरीका
bhindi ki kheti karne ka tarika

भिन्डी लगाने से पहले खेत की 2-3 बार अच्छी तरह से जुताई कर ले
उसके बाद सडी हुही गोबर की खाद गेर ले सड़ी हुही गोबर की खाद 20-25 टन प्रति हेक्टेयर के हिसाब से गेर ले
गोबर की खाद के साथ साथ यूरिया , D.A.P. , पोटास का भी उपयोग करे
उसके बाद यूरिया का उपयोग खड़ी फलस में 2 बार करना चाहिए पहली बार 30 दिन की फसल में ओर दूसरी बार 50दिन की फसल में करना। चाहिए
भिन्डी की खेती के लिये 10-12 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेकर लगाना चाहिए जिससे खेत में पोधो की उचित सख्या रहेगी
बीज उगते समय बीज के कतार की दूरी 45-60 सेमी ओर पौधे से पौधे की दूरी 25-30 सेमी होनी चाहिए (भिन्डी की खेती, Bhindi ki Kheti Kaise Ki Jaati Hai )

भिंडी में रोग नियंत्रण
bhindi me rog niyantran/bhindi me lagne wale rog

भिंडी में सफेद मच्छर की दवा

पित शिरा मोजेक रोग कहते हैं
ये भिंडी का सबसे खतरनाक रोग है यह रोग सफेद मखी द्वारा होता है यदि यह ज्यादा फेल जाए तो इसको रोकना नामुकिन हो जाता है
इसके लक्षण पतियो पर पीला वह चमकीला जाल दिखाई देता है पतिया छोटी रह जाती है और पोधा बोना रह जाता है इन सफेद मखियो को फैलने से रोकना बहुत जरुरी है इस लिए जिस पोधे में लक्षण दिखाई दे उसे जड़ों से उखाड़ कर जलादे जिससे रोग आगे फैलने से रुक जाएगा
जरूरत पड़ने पर इमिडाक्लोप्रिड 1 मिलीलीटर दवा का 3 लीटर पानी मे मिलाकर छीड़काव करे जिससे आप इस रोग पर काफी हद तक नियंत्रण पा सकते है (भिन्डी की खेती, Bhindi ki Kheti Kaise Ki Jaati Hai )

फल ओर तना छेदक किट से नुकसान/ bhindi me tana chedak

यह किट फलों में पतो में धिरे धीरे फेल जाता है सुराग बना लेता है और अंदर ही अंदर खाता है जिसके कारण फल उपयोग करने योग्य नही रहते ओर बाजार में भाव नही मिलता
इसके बचाव के लिए एजाडीरेक्टिन दवा आती है जिसका उपयोग 1मिलीलीटर 3 लीटर पानी मे मिलाकर छिड़काव करने से बचाया जा सकता है अगर 7 दिन में रिजल्ट ना मिले तो हर सप्ताह छिड़काव करते रहे
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भिंडी में लाल मकड़ी की दवा/ bhindi me lal makdi

 ये पोधे का रस चुस्ती है पतिया मुड़ जाती है ओर गरोथ भी रुक जाती है
 इसके बचाव के लिए सपिरोमेसिफेन 22.9% SC 15 लिटर पानी मे 18ml दवा मिला कर छिड़काव करें
 या प्रोपरजाइट 57%SC 15 लिटर पानी मे 40ml दवा मिला कर छिड़काव करें
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कस्तूरी भिंडी की खेती/ kasturi bhindi ki kheti

कस्तूरी भिंडी वनों ओर जगलो में पाई जाती है
अरब देसो में कस्तूरी भिंडी की सबसे ज्यादा मांग रहती है
कस्तूरी भिंडी सुगधित होने के कारण इत्र जगत में प्रचलित है इनके पुष्प पिले रग के पखुडियो के बीच हल्का बैगनी रग अत्यंत आकर्षक लगता है
इसकी बुवाई आम भिन्डी की तरह की जाती है
वह बुवाई के तुंरत बाद सिचाईं की जरूरत पड़ती है
अधिक पैदावार के लिए महीने में 2 बार सिचाईं करनी आवश्यक है
इसकी खेती करने में 5000 स्व 6000 तक खर्चा आता है
वह औसत पैदावार 40000 स्व 45000 तक हो जाती है
उसकी मांग ज्यादातर ओषधिय मार्केट तथा इत्र निर्माताओं में निरतंर बढ़ती जा रही हैं
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कस्तूरी भिंडी में रोग नियंत्रण

ज्यादातर वर्षा काल के बाद तने काटने वाले किटो का प्रकोप बढ़ता है जो ऊपर से मुह को काट देता है
वर्षा के बाद पोधे गलने लग जाते हैं
इसकी रोकथाम के लिए इफको का EGAO किट नियंत्रण ओर KAGUYA गलने से बचने में प्रयोग किया जाता है
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लाल भिंडी की खेती/ lal bhindi ki kheti

लाल रंग की भिन्डी पोषक तत्वों से भरपूर है
यह भिन्डी आम भिंडी से ज्यादा स्वादिष्ट ज्यादा अच्छी बताई जा रही है इसका विकास छत्तीसगढ़ में आदिवासीयो द्वारा उगाई जा रही भिंडी द्वारा हुवा
फिर इसे विकसित करने 8 से 10 सालों में IBR क्रषि विषव विद्यालय ने मेहनत की है
इसको उगाना भी आम भिन्डी की तरह आसान है
लागत भी उतनी ही आती है
लाल भिन्डी के लिए जमीन की तैयारी आम भिन्डी की तरह ही करनी होती है
इसकी पैदावार 130 से 140 क्विटल प्रति हेक्टेयर होती है
इसे सलाद के रूप में कच्चा भी खाया जा सकता है
इसकी बाजार में कीमत लगभग 100 से 500 रुपये किलो हो सकती है
इसका बीज आपको Amezon, flipkart पर मिल जायेग
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कुलवंत सिंह भाटी
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम कुलवंत सिंग भाटी है। मैं आपको किसान समाधान ब्लॉग पर खेती, फसलों, कृषि यंत्रो, खाद तथा किसानों के लिए आने वाली योजनाओं से जुड़ी सारी जानकारी शेयर करता हूँ।
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